Tuesday, December 24, 2013

समय बड़ा बलवान रे भाई....


दोनों ही फोटो श्री अरविन्द केजरीवाल जी की हैं, और एक ही जगह की भी हैं .... कुछ महीने पहले जब वो आम आदमी थे तब पुलिस उन्हें खीच के फैक रही थी और आज जब वो दिल्ली के मुख्यमंत्री बन गए तो आलम ही बदल गया !


वक्त से जादा ताकतवर कुछ भी नहीं, वो खान पे पड़े कोयले को भी हीरा बना देता हैं. किसी का आज देखकर उसकी बेज्जती या उपहास मत उडाओ कल क्या होगा ये किसी को भी नहीं पता !

Monday, February 1, 2010

जन गण मन ... रण है

राम गोपाल वर्मा की फिल्म "रण" का ये गाना कितना सच हैं ?

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जन गण मन ... रण है
इस रण में जख्‍मी हुआ है भारत भाग्‍य विधाता
पंजाब सिंध गुजरात मराठा एक-दूसरे से
लड़कर मर रहे हैं
इस देश ने हमको एक किया, हम देश के टुकड़े
कर रहे हैं
द्राविड़ उत्‍कल बंग, खून बहाकर हमने एक रंग
का कर दिया तिरंगा
सरहदों पर जंग और गलियों में दंगा-फसाद
विंध्‍य हिमाचल जमना गंगा में तेजाब उबल
रहा है,
मर गए सबके जमीर, जाने कब हो जिंदा आगे फिर
तब शुभ नामे जागे, तब शुभ आशिष मांगे
आग में जलकर चीख रहा है, फिर भी कोई
सच को नहीं बताता
गाए तब जय गाथा
देश का ऐसा हाल है, लेकिन आपस में लड़ हैं नेता
जन गण मंगल दायक जया है
भारत को बचा ले विधाता...
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Monday, November 30, 2009

फिल्म बनाना आसान कम नहीं

२६ नवंम्बर २००९ को मुझे भी एक ५ मिनट की फिल्म बनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. मेरी कंपनी सिमंटेक ने एक फिल्म बनाने का कार्यक्रम आयोजित किया जिसमे ५ मिनट की फिल्म बनानी थी और हमने भी एस मौके का पूरा आनंद लिया. ये ५ मिनट की फिल्म बनाने में हमरा १/२ दिन चला गया, सच में फिल्म बनाना कोई आसान काम नहीं. उम्मीद करता हू आप सब को हमारी फिल्म पसन्द आयेगी.

Friday, June 19, 2009

चाणक्य नीति:विवशता में करते हैं भक्ति का नाटक

1.भंवर जब तक कमल दल के बीच रहता है तो उसके फूल का मजा लेता है पर अगर उसे वहां से दूर तौरिया का फूल भी उसे बहुत आनन्द देता. इसी कारण मनुष्य को भूखे रहने की बजाय कुछ खा लेना चाहिए. अगर अपनी मनपसंद का भोजन नहीं मिले तो जो मिले उसे खा लेना चाहिए-भूखा रहना ठीक नहीं है.

2. जब कोई शक्तिहीन साधू, धनहीन ब्रह्मचारी और रोगी किसी देवता का भक्त बनता है तो उसे ढोंगी कहा जा सकता है. वास्तविकता यह है कि बलवान कभी साधू, धनवान कभी ब्रह्मचारी नहीं बनता. सब लोग विवशता के कारण नाटक करते हैं और कुछ नहीं.

3. अगर आदमी का स्वयं का मन ठीक है तो उसे भक्ति का पाखंड करने की जरूरत नहीं पड़ती! लोभी को दूसरे के दोषों से क्या? चुगली और परनिन्दा करने वाले को दूसरे के पापों से सत्यवादी को तपस्या से हृदय की स्वच्छता वाले को तीर्थ यात्रा से, सज्जन को दूसरे के गुणों से क्या वास्ता? अगर अपना प्रभाव है तो भूषन से, विधा है तो धन से और अगर अपयश है तो मृत्यु से क्या लाभ?

4.मनुष्य की चार चीजों की भूख कभी नहीं बुझती. धन, जीवन स्त्री और भोजन. इसके लिए वह हमेशा लालायित रहता है.

Thursday, June 18, 2009

मै कांटो का दीवाना हू

फूल मुझे पसंद नहीं, मै कांटो का दीवाना हू! मै जलने वाली आग नहीं, जल जाने वाला परवना हु! ख्वाब मुझे पसंद नहीं, मै हकीकत का आशियाना हु! मै मीटने वाली हसरत नहीं, जीने वाला अफसाना हु! मै थमने वाला वक़्त नहीं, न छु पाने वाला कीनारा हु! मै रूकने वाली सांस नहीं, सदा दील मे धडकने वाला सहारा हु!...

Saturday, April 18, 2009

हमें पता ना था जिन्दगी ये भी दिन दिखायेगी,
जिन्हें हमने जान से जादा चाहा, उन्हें हमारी ही चाहत रुलाएगी |