Thursday, June 18, 2009

मै कांटो का दीवाना हू

फूल मुझे पसंद नहीं, मै कांटो का दीवाना हू! मै जलने वाली आग नहीं, जल जाने वाला परवना हु! ख्वाब मुझे पसंद नहीं, मै हकीकत का आशियाना हु! मै मीटने वाली हसरत नहीं, जीने वाला अफसाना हु! मै थमने वाला वक़्त नहीं, न छु पाने वाला कीनारा हु! मै रूकने वाली सांस नहीं, सदा दील मे धडकने वाला सहारा हु!...

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